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Piyush chauhan

Ujjain Wale 
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About Me.

Piyush Chauhan / Ujjain Wale
पूरे सप्ताह अपनी नोकरी, व्यापार का निर्वहन करने के बाद हर व्यक्ती को रविवार का दिन बड़ा प्यारा लगता है, उस दिन आराम से सोना, लेट उठना, पूरे 6 दिन की थकान उतारना, पर इन बातों की फिक्र करे बगेर उज्जैन वाले ग्रुप के साथियों ने रविवार को सुबह 9 बजे मंगलनाथ पहुँच कर ग्राम कोलूखेड़ी में श्रमदान कर जो ऊर्जा दिखाई है उसके लिए जितना कहो कम है, जिसमे आदित्य सिंह जी, और हमारे मंगलेश जी, जो की आज के लिए युवाओं के लिए मिसाल है, और हे हमारे आदरणीय पाहवा जी जिनके मार्गदर्शन से हमे ये नेक कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ, साथ मे है हमारे ग्रुप की आन बान शान संजय व्यास जी जिनके कुशल नेतृत्व में आज सभी को एकत्रित किया, कार्यक्रम में मनोरंजन और भी बढ़ गया जब लोधी साहब ने भी हमारे साथ कार्य कर थोड़ा हँसी मजाक का टॉनिक हमे पिला दिया, कुल मिला कर आज की सुबह आनन्दमयी रही, में आदरणीय पाहवा जी, संजय व्यास जी और ग्रुप के सभी महानुभावो से आग्रह करूँगा की इस प्रकार के श्रमदान के कार्यक्रम आप और भी रखे, जिससे हमें हमारे नगर को स्वच्छ, सुंदर, हरा भरा बनाने का सौभाग्य प्राप्त हो।

    

Ujjain Wale

Ujjain Wale

#उज्जैन_वाले से जब मुझे जोड़ा गया, तब मुझे लगा की एक और टाइम पास करने का माध्यम मिला, और लोगों की पोस्ट को देख कर मुझे भी उत्सुकता हुई, मेने भी पोस्ट करना चालू किया, 1-2 फिर 4-5 कभी कभी तो दिन में 10-12 पोस्ट भी कर डाली, पर मैने देखा की मेरी इतनी पोस्ट डालने के बाद भी नज़र सिर्फ 2-3 पोस्ट ही आरही है, मेने सोचा ग्रुप एडमिन ज्यादा भाव खा रहा है और उन्हें मेसेज कर के कह दिया की मुझे जरूरत नही है आपके ग्रुप की और ग्रुप छोड़ दिया।

कुछ दिनों बाद अचानक #उज्जैन_वाले ग्रुप की पोस्ट किसी व्यक्ती के द्वारा शेयर करने पर मेरी वाल पर नज़र आई, में फिर उत्सुकता वश ग्रुप में घुस आया, मेने पोस्ट को देख कर उनके ऊपर आये कमेंट को पढ़ना चालू किया और फिर मुझे ग्रुप की वास्तविकता का अंदाज़ा हुआ, मेने भी फिर व्यक्तिगत दृष्टिकोण से परे हो कर सामूहिक दृष्टिकोण के नज़रिये से देखना और पोस्ट करना चालू किया।

एक दिन ग्रुप में मिलन समारोह को ले कर राय मशवरा होने लगा, मेने भी अपनी सलाह दी, तय दिनांक और समय पर मिलन समारोह का आयोजन किया, वहाँ लोगो से मेल मिलाप किया एक सकारात्मक वातावरण की अनुभूति मिली।
मिलन समारोह में सबने अपने अपने विचार रखे, पर मन मे संशय फिर भी था की क्या ये विचार धरातल पर उतरेंगे??

अचानक ग्रुप के एडमिन संजय व्यास जी और ग्रुप के सम्माननीय सदस्य राजीव जी पाहवा की पोस्ट देखने को मिली रविवार को हम ग्राम कोलूखेड़ी जारहे है जो भी सदस्य आना चाहे उनका स्वागत है, दिमाग मे क्लिक हुआ क्या पता क्या करेंगे, तय समयानुसार मंगलनाथ पहुँचा तो देखा कि 10-12 लोग खड़े है कोई 2 पहिया से कोई 4 पहिया से, अमूमन ही कोई मेरी जान पहचान का होगा, फिर वहाँ से चल दिये कोलूखेड़ी जाकर देखा कुछ समझ नही आया क्या करना है यहाँ तो गेती, फावड़े, दराते, खुरपी, तगारी, बाल्टी सब रखा है, मैने राजीव जी से पूछा करना क्या है, उन्होंने बहुत साधारण लहज़े में कहा ये तुम्हारे नए मित्र (पेड़ पौधे) है जो चाहो करो, उनके शब्द कान से होते हुए मस्तिष्क के अनन्तकाल में चले गए, उठाया फावड़ा और चल दिये नए मित्रों (पेड़ पौधे) से मिलने, नए मित्र (पेड़ पौधे) मानो इंतज़ार ही कर रहे थे मेरा, कुछ कहना चाह रहे थे, पर नया होने के कारण थोड़ी झिझक मुझमें भी थी, और थोड़ी झिझक उनमे भी थी, थोड़ा मिलना जुलना हुआ, फिर वहाँ बैठ कर आये हुए सभी @उज्जैन_वाले सदस्यों से बात चीत हुई, थोड़े भजन गाये, थोड़ी मस्ती करी, नाश्ता किया और घर आगये।

सोमवार बिता, मंगलवार बिता, बुधवार बिता, ग्रुप में लगातार वीडियो और फ़ोटो देखने मे आ रहे थे, वीडियो और फ़ोटो में नए मित्र (पेड़ पौधे) भी मुस्कुराते हुए नज़र आरहे थे, कुछ कहना चाह रहे थे, मन मे आया मुझे उनसे मिलना पड़ेगा, गुरुवार बिता, शुक्रवार को ग्रुप में पोस्ट आयी पिछले रविवार की तरह इस रविवार को हम रेतिघाट पर मिल रहे है, दिमाग मे क्लिक हुआ रेती घाट तो नज़दीक ही है जाना चाहिए, तय समयानुसार रेतिघाट पहुँच गए बीवी बच्चे को ले कर, ऐसा प्रतीत हुआ मानो ये नए मित्र (पेड़ पौधे) मेरी ही प्रतीक्षा कर रहे थे, दूसरी बार मिलना हुआ तो बातें भी बढ़ी कुछ उन्होंने कहा कुछ मेने सुनाई, ऐसा लगने लगा की परमेश्वर ने धरती पर भेज तो दिया, माँ, बाप, भाई, बहन, दोस्त, सहेली, रिश्तेदार सब कुछ दिया, पर कुछ था जो मुझसे दूर था, मेरे सच्चे मित्र जिन्हें में तो आज तक कुछ भी नही दे पाया और वो मुझे इस धरती पर आने के पहले से देते आरहे है, वो ऐसा कुछ दे रहे थे जिसके बगैर मेरा जीना असम्भव है, आज जब में उनके साथ खड़ा था तो उन्होंने मुझसे कोई शिकायत नही करी, कोई रुसवाई नही करी, बस मुझसे बातें करते रहे, अठखेलियाँ करते रहे, में भी इस अनमोल क्षण का आनन्द लेता रहा, और इसी तरह ये सिलसिला आगे बढ़ता रहा और #उज्जैन_वाले ग्रुप के माध्यम से मुझे मेरे अभिन्न मित्रों से मिलने का अवसर हर रविवार को मिलने लगा, अब सप्ताह के 6 दिन का इंतज़ार बड़ा खटकने लगा है, और रविवार तो ऐसा लगता है मानो ज़िंदगी मिल गई।

इस तरह से मुझे मेरे पंखों को उड़ान मिली में आभार प्रकट करता हु माननीय Sanjay Vyas जी का, Jaywant Dabhade जी का, Sameer Sharma जी का, Puneet Bhatnagar जी का, Ashish Johri जी का, Dileep Pawar जी का, Manglesh Joshi जी का, Ojas Vyas जी का, Rajeev Joshi जी का जिन्होंने इतने सुंदर ग्रुप की रचना करी जिसके द्वारा में अपनों से मिल सका, और में दिल से आभारी हूँ माननीय श्री Rajeev Pahwa जी का जिनके अथक प्रयासों से आज हमे हमारी माँ क्षिप्रा का और हमारे अभिन्न मित्रो (पेड़ पौधे) का सानिध्य मिला।

Ujjain Wale

जय राम जी की साब, हम काल फेर गया था क्षिप्रा मैया ने पेड़ पौधा होनो की सेवा वास्ते, अब कई बतऊ वी Sanjay दाई जी ने गजब को काम हाथे लगवायो ने पेड़ पौधा होण से दोस्ती करवई ने वी Rajeev दाई जी ने हमारे खुरपी, दरातो, फावड़ों, कुदाल सब चलाता सिखई दियो, काले फेर सगळा का सगळा भेला हुई के वा गऊघाट पे पोची गिया, अब जाते ज अपना Manohar दादा तो भिड़ी ग्या काम मे ने पाछे पाछे अपनो Mangleshyo भी खुरपी लई ने पोची ग्यो ने खोदवा लागी ग्यो, ने आज तो उ Lucky लोकेश्यो बी अइ ग्यो थो, ने आज तो वी Manish दादा हमारा वास्ते बिल्ला बनइ लाया था, थारी सोगन बिल्लो इतरो भेतरीन बनियो है कि लगावा में मजो अइ ग्यो, म्हने तो आज तक उतारियो ज नी, ने वी है नी Rajneesh दादा आज फेर कैमरों लई ने आया था, ने आज तो क़ज़ा का का चढ़ी के फोटू खिच्या उनने की मजा अइ ग्या, ने वी Rudhir दादा बी बाल्टी ने उनका मोबाइल को कैमरों दोनो के ज सम्हाली रिया था, ने आज तो उ लखेरवाड़ी वालो Rajkumar भइ बी मिल्यो थो, उ बी अई ग्यो थो सेवा करवा वास्ते, वी है नी Lokendra दादा वी बी लगिया हुआ था आज तो सेवा भाव मे, ने अपना Mahendra भई जी है नी हाँ वी ज मोदी वाला, वी बी पानी की बाल्टियाँ तोकि तोकि ने पाणत करे जई रिया था, ने वी है नी Bhagwan दादा लंबा वाला कई काम करे की कदी अई खोदे कदी वई, ने उ है नी अपनो Aditya भइ उ बी सवेर माय से इंदिरा नगर से अइ ग्यो थो ने Gourav भइ के छोड़ियायो, उने की थी में चलूंगा, ने वी है नी Manmohan दादा वी बी लगिया था चकाचक हुई के काम मे, ने आज तो उ Bhuvan भई बी अइ ग्यो थो अपनो, ने Vilas दादा बी आया था वी जिनकी पोस्ट होण के लाइक करता रा अपन, ने वी Harish दादो आज फेर बिना पोया जलेबी खाये चली ग्यो, ऊके माताजी पुजवा जानो थो, ने माताजी पुजवा तो अपना Jitendraa दा भइ बी गया है, ने वी DrJeevanडाकसाब तो आज गच्चो मारी ग्या, आज वा Barkha बेन बी अइ थी, उ का फोटू होण की परदरसनी लगी थी वा फिरिगंज का मेरे, ने Sakha बइ बी अइ ग्या था, वी तो बिना छुट्टी बनाये हर बार अइ जाए, ने आज Menka बेन नई अई, काम होयगो उ के नी तो अइ जाए वा बी, ने वा है नी अपनी Shireen बइ, घणी बकबक करे जो वा आज उका बइ बाउजी से मिलवा गई है उ का पियर, 1 महीना बाद आएगी, उ का बइ बाउजी को माथो खई जाएगी महीना भर, ने वी Anurag दाई जी तो आये ज सइ, ने काम का टेम काम करी के फेर आराम से बात करे, ने वी Jaywant दाई जी बी था, उनको काम निरालो है उनके फ़ालतू बाता से मतलब कोणी, अपनो काम करे ने सगळा के समझाता रे, ने अपना Dileep दाई जी है नी, वी काम मे असा भिड़े की कोई बी अइ जाए फेर, काम खतम करी के ज माने, ने दो बार से तो वी इंगलिस वाला Abhilash भिया बी अइ रिया है, Ashok दादा बी नगे अइ ग्या काल तो, ने अब नगे आता ज रेगा, सगळा का सगळा गऊघाट से काम काज निमटई के वा पास में जंतर मंतर चली ग्या ने वा बैठिया तो वी Mishra बाबूजी ने टोपी पिरई दी, वा पेरवा वाली रे सफेद झक्क, घणी हउ टोपी है वा, ने फेर वा ठंडी हवा में हरी घास पे बैठी के समोसा ने पोया ने जलेबी खइ, जलेबी से याद आयो वी है नी Haneef ताऊजी आज फेर धरई ग्या, जलेबी सूती रिया था, ने आज तो पेपर का नीचे दबइ ली थी, ने म्हारे के की तू फोटू मत खिंच जे नी तो थारो कैमरों म्हारे जमा करई दे, मेने बी कल्टी में 2-4 फोटू खिंची लिया उनका, अब घरे ताईजी बक्केगा उनके, सगळा खई पी ने बैठिया था की वी जंतर मंतर वाला बाबूजी अइ ग्या, फेर उनने सगळा के जंतर मंतर की घड़ी ने यन्त्र होण का बारा में समझायो, थारी सोगन नाना अपना राजा महाराजा होण 300 साल पेला ज घड़ी ने वी तारा हों देखवा को यंत्र बनइ ग्या, ने अपना ने कदर ई कोनी उनकी, काल उनने समझायो तो दिल मे अतरी आस अइ के पेला का लोग होण अपना वास्ते कितरी चीजा बनइ ग्या, फेर वा से निमटी के सगळा जना भेला हुई के फोटू खिंचावा लगी ग्या, सगळा को भेल में फोटू खिंची के ने अपना अपना घर चली ग्या, अब म्हारी बात सुन भायना बनावा वाला तो बनाता ज रेगा, तू तो म्हारा साते चल जे अगला दितवारे, सवेरे 7:30 बजे तियार हुई जा जे वा प्रसान्ति धाम का मेरे चलांगा।
तो याद रख जो सगळा 1/4/2018 का दन सवेरे 7:30 बजे प्रसान्ति धाम का मेरे पोचनो है, ने आनन्द लेनो है।

Ujjain Wale

कहानी आपकी भी है।

सन 1990 की बात है, में बहुत छोटा था, यही कुछ 5-6 वर्ष का, पर याद है मुझे कुछ किस्से, सुबह 5 से 6 बजे तक और शाम को 5 से 6 बजे तक घरों में नल से पानी आता था, ज्यादा संसाधन नही थे, छत कवेलू की थी तो टँकी बनाने का सवाल ही पैदा नही होता था, घर मे मम्मी, बहन, दादी मिल कर बाल्टी, तपेले, ड्रम में पानी भरती थी, एक दम साफ सुथरा पानी आता था, दादी से किस्से सुने थे, की अभी तो नल से पानी आरहा है, पहले तो नदी से पानी लाते थे, नदी का पानी ही पीते थे, नदी का पानी साफ और औषधीय गुणों से भरा होता था, मन कल्पना की उड़ान भरने लगता था, कितनी साफ और सुंदर होगी नदी, हरियाली से भरपूर, कलकल बहती धारा, शुद्ध हवा, शुद्ध पानी कितना अनमोल वातावरण दे गए हमारे पूर्वज हमे विरासत में, और हमने उस विरासत का उपयोग तो किया पर सहेजना भूल गए, और आज वो हवा (O2) भी खरीदना पड़ रही है, और पानी भी खरीदना पड़ रहा है, इसी तरह चलता रहा तो हम हमारी आने वाली पीढ़ी को विरासत में क्या देकर जाने वाले है, प्रदूषण वाली हवा, चित्र-प्रदर्शनी में हरियाली, एक दम गन्दे नाले की तरह दिखती शिप्रा मैया।
यही सब कुछ दिमाग मे चल रहा था की एक अविस्मरणीय पल ने ज़िंदगी को एक ऐसी सोच पर लाकर खड़ा कर दिया,
हम है उज्जैन वाले,
बाबा महाकाल के वन में मंडराने वाले,
माता हरसिद्धी का आशीर्वाद पाने वाले,
द्वारकाधीश के आंगन में लीला करने वाले,
कालभैरव की उपासना करने वाले,
राजा विक्रमादित्य की प्रजा वाले,
पर हम है उज्जैन वाले।

और निकल पड़े शिप्रा मैया के आंगन में अठखेलियाँ करने, बागडोर पकड़ चलने लगे Sanjay जी, उधर से एक मार्गदर्षक के रूप में Rajeev जी पधारे, संग में परिवार को ले कर, Sakha जी और Menka जी, एक गृहिणी और एक छात्रा सुबह के सारे कार्य छोड़ कर चले प्रकर्ति संवारने, निकले ही थे की सामने अपनी व्यस्त दिनचर्या वाले Jaywant जी भी साथ हो लिये, 24 में से 23 घण्टे दिमाग को व्यस्त रखने वाले Dileep जी भी दिखाई दिए, मानो अब कुछ कर गुजरेंगे, सामने ही एक प्राइवेट नोकरी के तनाव को लिए घूमता बन्दा Manglesh भी आगया, काम के सिलसिले में दिन भर धूप में भटकते रहने वाले Jitendraaजी भी अपने कार्य छोड़ कर शामिल हो गए, उधर सुबह 4 बजे से व्यवसाय में व्यस्त रहने वाला Lokesh भी निकल पड़ा, चले ही थे की एक गृहिणी Shireen जी ने भी पूछ लिया और वो भी चल पड़ी, आदित्य सिंह ने भी इस अभियान में जान डाल दी, Harish जी ने जनजागरण करना चालू किया, Haneef ताऊ जी भी हरसंभव प्रयास करने लगे, Ashok Chouhan जी ने भी हिम्मत जुटाई, Bhagwan दादा की भी सूझबूझ काम आई, DrJeevan ने भी व्यस्तता से परे सहयोग देना चालू किया, Lokendra जी का साथ मन लुभाने लगा, Manmohan जी का ज्ञान प्रकृति सँवारने में काम आया, Rajneesh जी के चित्रण से उम्मीद की किरण दिखाई पड़ी, Manohar जी का हुनर भी फायदेमंद साबित हुआ, Rudhir भैया भी परिवार संग साहस बढ़ाने आये, Vilas Bhonsle जी मित्रों को जोड़ संख्या बल बढ़ाने लगे, Manish Shukla जी के फॉर्मूले नई ऊर्जा प्रदान करने लगे, Mahendra Verma जी आत्मीय प्रेरणा देने लगे, Anurag Titov जी ने प्रकृति सँवारने का राग सुनाया, Abhilash जी ने व्यस्त होते हुए भी साथ निभाया, Sanjay जी ने प्रकृति का अवलोकन कर इलाज करना प्रारंभ किया, Barkha जी भी कला के साथ कार्य करने लगी, Bhuvan भी अपने काम धंधे से समय निकाल कर आने लगा, Rajkumar जी की सेवा भी मनभावन लगने लगी, Gourav Rokade जी की प्रकृति के प्रती रुचि और निखरने लगी, Nishchhal Yadav जी सामाजिक कार्य कर लोगों को प्रेरित करने लगे, Sourabh भी पिता जी Balkrishna Dadheech जी संग आने लगा, Chetan Vaishnav जी भी दराते खुरपी चलाने लगे, Narendra Kumar जी बाहर से आकर अपनी इच्छा बताने लगे, और भी अनेक लोगों ने प्रकृति को अपनी विरासत मान माँ शिप्रा के आंचल को संवारने में सहयोग करने लगे।

क्या लगता है मित्रों के चंद लोग मिल कर शिप्रा मैया को सहेज लेंगे, हरियाली ला देंगे, वातावरण शुद्ध कर देंगे, क्या चल रहा है कुछ समझ नही आरहा है, पर में आपको विश्वास दिलाता हूं के पागलों की ये टोली निकल पड़ी है अपनी विरासत बचाने, अब देखना ये है कि इस कृत्रिम दुनिया की मोह माया से बाहर निकल कर अपनी विरासत बचाने कब निकल कर आते है, हम तो हमारे बच्चों को अपनी विरासत से रूबरू करा ही रहे है, आप कब अपने बच्चों को ये बताएंगे की हमारे पूर्वजों ने हमे विरासत में ये अनमोल वातावरण दिया है।

मेरा अनुरोध है समस्त उज्जैन वालों से, सप्ताह में 2 घंटे अपनी अमूल्य विरासत के लिए निकालिये, और अपने बच्चों का इससे परिचय करवाइए।


Ujjain Wale

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sharma sir,jitendraa ji,Piyush ji

यूं ही अचानक किसी ने पूछ लिया,

कौन है #उज्जैन_वाले,
क्या करते है #उज्जैन_वाले,
कहाँ रहते हैं #उज्जैन_वाले,
कैसे हैं #उज्जैन_वाले,

हमने भी सरल लहज़े में कह दिया,

जहाँ

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Rajeev Pahwa ji,bHAGWAN SINGH JI

ब्राह्मण का साथ ले कर,
राजपूत की आन ले कर,
कायस्थ का ज्ञान ले कर,
मराठा का अभिमान ले कर,
जाट भाई की शान ले कर,
शुद्र का सम्मान ले कर,
मुस्लिम का फ़रमान ले कर,
बोहरा का संज्ञान ले कर,
जैन का अरमान ले कर,

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tEAM uJJAIN wALE

अहीर का वरदान ले कर,
बनिये की पहचान ले कर,
सिंधी का मिष्ठान ले कर,
पंजाबी का दान ले कर, 
गुजराती का गान ले कर,

माँ शिप्रा के आंचल हेतु, 
मेहनत का श्रमदान ले कर,
संग चले है जिस्म अनेक,
एकता की जान लेकर,

संग बैठना कभी हमारे,
तहज़ीब तुम्हे सिखलायेंगे,
क्या प्रेम घुला है यहाँ फ़िज़ा में,
#उज्जैन_वाले बतलायेंगे।।



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